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भोपाल में नेताओं की कमी थी जो प्रज्ञा को चुनाव मैदान में उतार दिया;मुंह दिखाई का काम हो रहा है भाजपा में

-प्रज्ञा सिंह जीत गई तो संन्यास लेना पड़ेगा भाजपा नेताओं को
भोपाल । भारतीय जनता पार्टी ने भोपाल संसदीय क्षेत्र से साध्वी प्रज्ञा सिंह को चुनाव मैदान में उतारा है। मालेगांव बम कांड में कई वर्षों तक जेल में रहने और आतंकवाद के प्रतीक के रूप में प्रज्ञा सिंह का नाम सारे देश में जाना जाता है।
टिकट वितरण के पूर्व भोपाल के सभी नेताओं ने एकजुट होकर स्थानीय नेता को टिकट देने की पुरजोर अपील, केंद्रीय नेताओं से की थी, किंतु टिकट प्रज्ञा सिंह को मिली। इससे भोपाल के भाजपा नेता हैरान और परेशान हैं।
भाजपा नेताओं का कहना है कि एक साध्वी उमा भारती को भारतीय जनता पार्टी नहीं झेल पा रही है। ऐसी स्थिति में यदि प्रज्ञा सिंह चुनाव जीतकर भोपाल में आ गई तो हम लोगों को बोरिया -बिस्तर लेकर बाहर जाना पड़ेगा। यही कारण है कि स्थानीय भाजपा के नेता लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान बड़े तरीके से मुंह दिखाई के काम को अंजाम दे रहे हैं।
केंद्रीय हाईकमान चिंतित
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने प्रज्ञा सिंह के माध्यम से सारे देश में हिंदू मतों के ध्रुवीकरण की जो रणनीति बनाई है। उसमें स्थानीय नेताओं का सहयोग नहीं मिलने से हाईकमान काफी चिंतित है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार दिल्ली से कुछ लोगों को भोपाल भेजा गया है, जो साध्वी प्रज्ञा सिंह के चुनाव प्रचार का जिम्मा संभालेंगे।
जनता में तीव्र प्रतिक्रिया
साध्वी प्रज्ञा सिंह का नाम सामने आने के बाद भोपाल में इसकी बड़ी तीव्र प्रतिक्रिया हुई है। भोपाल की गंगा-जमुनी तहजीब और पुराने नवाबों का शहर होने के कारण हिंदुओं के बीच में भी साध्वी प्रज्ञा भारती के आक्रमक बोल हिंदुओं को पसंद नहीं आ रहे हैं। जिसके कारण हिंदू ध्रुवीकरण भोपाल और देश के अन्य हिस्सों में होने की जो कल्पना संघ के नेताओं ने की थी। उसमें भोपाल के ही नेता अवरोध बनकर सामने आ गए हैं। भाजपा के नेताओं का यह भी कहना है कि उमा भारती ही मध्य प्रदेश भोपाल के लिए काफी थी। यदि प्रज्ञा सिंह और आ गई, तो यहां के भाजपा नेताओं को सन्यास में लेना पड़ेगा।

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