Wed. Jun 26th, 2019

बजट का है अभाव, कैसे हो जल भराव ; 56 साल पुराने बांध में पानी का भराव नहीं, नहरें भी सूखी

शहडोल । जिले के सिंहपुर गांव की सीमा से लगे सरफा नदी पर 1963 में बनाया गया ऐतिहासिक बांध आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। इस बांध से करीब 15 किलोमीटर लंबी नहर निकाली गई थी, जिससे सैकड़ों किसानों को लाभ मिलता था। लेकिन अब 56 साल पुराना बांध रखरखाव और संरक्षण के अभाव में अपना अस्तित्व बचाए रखने प्रशासनिक रहमो-करम का मोहताज दिखाई दे रहा है। इसके साथ ही आसपास के गांवों के किसान अपनी फसलों के लिए पानी को तरस रहे हैं। 
जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर सिंहपुर गांव की सीमा पर बना ऐतिहासिक बांध आज अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है। सिंहपुर गांव की सीमा से लगे सरफा नदी पर उक्त बांध का निर्माण वर्ष 1963 में किया गया था। उसके बाद वर्ष 1972 में इस बांध से लगभग 15 किलोमीटर लंबी नहर निकाली गई थी, जिससे आसपास के सैकड़ों किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलता रहा है। वही बांध अब देखरेख और संरक्षण के अभाव में अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। इस बांध और इससे निकाली गई नहरों पर ध्यान नहीं दिया गया, आलम यह है कि बांध में नदी के पानी का भराव ही नहीं हो रहा है, बरसात के दिनों में जो पानी भरता है वह भी अप्रैल माह के अंत तक सूख जाता है। यही वजह है कि वर्तमान समय में उक्त बांध मैदान की तरह नजर आने लगा है।

सपाट बांध में ही खेती 
बताया जाता है कि बांध के किनारों की मिट्टी बहकर बीच में आ गई है जिससे उसकी गहराई काफी कम हो गई है। मिट्टी का भराव हो जाने से जहां पर बांध ने मैदानी स्वरूप ले लिया है वहां पर कुछ लोग कृषि कार्य करने लगे हैं। वहीं बांध में पानी को रोकने के लिए जो दीवार बनाई गई है वह भी जर्जर स्थिति में पहुंच गई है। कुल मिलाकर पिछले कई सालों से इस नहर से किसानों को पानी नहीं मिल पा रहा है। उक्त बांध से निकाली गई नहर पांच गांवों से होते हुए नरगी, उधिया होकर कंचनपुर गांव तक जाती है। उधिया निवासी हरिवंश शुक्ला बताते हैं कि नहर काफी पुराना हो चुका है, साथ ही बांध के पट जाने के कारण पिछले एक दशक से नहर में पानी नहीं आ रहा है।

प्रशासनिक पहल नहीं 
इसी प्रकार अन्य किसानों का कहना है कि पहले उन्हें दोनों रबी और खरीफ के सीजन में पर्याप्त पानी मिल जाता था, लेकिन अब बिल्कुल भी पानी नहीं मिल रहा है। किसानों की मानें तो विभागीय अधिकारियों को इस बात से अवगत भी कराया जा चुका है, लेकिन अधिकारी बजट नहीं होने की बात कह कर इस समस्या से मुंह मोड़ लेते हैं। बताया जाता है कि बांध और नहर की समस्याओं को लेकर स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन के समक्ष गुहार लगाई थी, जिसके बाद तत्कालीन कलेक्टर अनुभा श्रीवास्तव ने बांध का अवलोकन भी किया था। इसके बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।

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